सारंगढ़ में चूना पत्थर खदान को लेकर विरोध तेज: जनसुनवाई स्थगित करने की मांग, रातभर धरने पर बैठे ग्रामीण

Sarangarh, CG

छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम कपिस्दा (ब) में प्रस्तावित चूना पत्थर खदान को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार उग्र होता जा रहा है।

खदान परियोजना से प्रभावित होने वाले पांच गांवों के करीब दो हजार ग्रामीण सोमवार रात से ही धरने पर बैठे हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी पूरी रात डटे रहे और जनसुनवाई को स्थगित करने की मांग करते रहे।

2 हजार ग्रामीणों का विरोध, रातभर जारी रहा धरना

ग्रीन सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 500 एकड़ जमीन में चूना पत्थर खदान खोलने की योजना है। ग्रामीणों का कहना है कि खदान के लिए उनके खेत और निजी जमीन अधिग्रहित की जाएगी, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। इसी विरोध में धौराभांठा, सरसरा, जोगनीपाली, कपिस्दा (ब) और लालाधुरवा गांवों के लोग रातभर धरना स्थल पर बैठे रहे।

17 नवंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई पर रोक की मांग

कंपनी द्वारा 17 नवंबर को जनसुनवाई आयोजित की जानी है, लेकिन ग्रामीण इसे पूरी तरह खारिज करते हुए सुनवाई स्थगित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि गांव में खदान खुलने से पर्यावरण, खेती और जलस्रोतों पर गंभीर असर पड़ेगा। प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस बल भी मौके पर तैनात किया गया है।

“जमीन हमारी जीवनरेखा है, नहीं देंगे” — ग्रामीण

धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं ने कहा कि जमीन उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है और वे इसे किसी भी हालत में छोड़ने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कंपनी को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि वे किसी भी कीमत पर चूना पत्थर खदान नहीं खुलने देंगे।

विधायक भी पहुंचीं समर्थन में

सारंगढ़ की विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े भी ग्रामीणों के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने ग्रामीणों की मांगों को जायज बताते हुए प्रशासन से जनसुनवाई स्थगित करने और ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने की अपील की।

प्रशासन समझाइश में जुटा, ग्रामीण अड़े रहे

जिला प्रशासन की ओर से अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि खदान परियोजना शुरू होते ही गांवों की खेती, पर्यावरण और जीवनशैली पर गहरा असर पड़ेगा।

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www.dainikjagranmpcg.com
17 Nov 2025 By दैनिक जागरण

सारंगढ़ में चूना पत्थर खदान को लेकर विरोध तेज: जनसुनवाई स्थगित करने की मांग, रातभर धरने पर बैठे ग्रामीण

Sarangarh, CG

खदान परियोजना से प्रभावित होने वाले पांच गांवों के करीब दो हजार ग्रामीण सोमवार रात से ही धरने पर बैठे हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी पूरी रात डटे रहे और जनसुनवाई को स्थगित करने की मांग करते रहे।

2 हजार ग्रामीणों का विरोध, रातभर जारी रहा धरना

ग्रीन सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 500 एकड़ जमीन में चूना पत्थर खदान खोलने की योजना है। ग्रामीणों का कहना है कि खदान के लिए उनके खेत और निजी जमीन अधिग्रहित की जाएगी, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। इसी विरोध में धौराभांठा, सरसरा, जोगनीपाली, कपिस्दा (ब) और लालाधुरवा गांवों के लोग रातभर धरना स्थल पर बैठे रहे।

17 नवंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई पर रोक की मांग

कंपनी द्वारा 17 नवंबर को जनसुनवाई आयोजित की जानी है, लेकिन ग्रामीण इसे पूरी तरह खारिज करते हुए सुनवाई स्थगित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि गांव में खदान खुलने से पर्यावरण, खेती और जलस्रोतों पर गंभीर असर पड़ेगा। प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस बल भी मौके पर तैनात किया गया है।

“जमीन हमारी जीवनरेखा है, नहीं देंगे” — ग्रामीण

धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं ने कहा कि जमीन उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है और वे इसे किसी भी हालत में छोड़ने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कंपनी को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि वे किसी भी कीमत पर चूना पत्थर खदान नहीं खुलने देंगे।

विधायक भी पहुंचीं समर्थन में

सारंगढ़ की विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े भी ग्रामीणों के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने ग्रामीणों की मांगों को जायज बताते हुए प्रशासन से जनसुनवाई स्थगित करने और ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने की अपील की।

प्रशासन समझाइश में जुटा, ग्रामीण अड़े रहे

जिला प्रशासन की ओर से अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि खदान परियोजना शुरू होते ही गांवों की खेती, पर्यावरण और जीवनशैली पर गहरा असर पड़ेगा।

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